Published on: 17 Apr 2026
*बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के जीवन एवं महिलाओं के सशक्तिकरण में उनके योगदान पर व्याख्यान का आयोजन।*
इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर के होटल एवं टूरिज्म मैनेजमेंट विभाग द्वारा एक प्रेरणादायक व्याख्यान का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों कोबाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर जी के संघर्षपूर्ण जीवन, सामाजिक न्याय के प्रति उनके अटूट समर्पण तथा महिलाओं के सशक्तिकरण में उनके ऐतिहासिक योगदान से अवगत कराया गया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रो. सतीश ने छात्रों को बाबा साहेब के जीवन की यात्रा से परिचय करवाया। उन्होंने बताया कि कैसे डॉ. आंबेडकर जी ने गरीबी, छुआछूत और सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध संघर्ष करते हुए उच्च शिक्षा प्राप्त की, कोलंबिया और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से डिग्री हासिल की तथा भारतीय संविधान के मुख्य निर्माता के रूप में देश की सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक व्यवस्था को नई दिशा प्रदान की। प्रो. सतीश ने बाबा साहेब के प्रसिद्ध नारे “शिक्षित बनो, संगठित हो और संघर्ष करो” पर विशेष जोर देते हुए छात्रों को प्रेरित किया कि शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से ही समाज में समानता और न्याय स्थापित किया जा सकता है।
डॉ. प्रियंका रंगा ने बाबा साहेब द्वारा महिलाओं के सशक्तिकरण में किए गए योगदान पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि डॉ. आंबेडकर महिलाओं की प्रगति को किसी भी समाज की प्रगति का मापदंड मानते थे। उन्होंने हिंदू कोड बिल के माध्यम से महिलाओं को संपत्ति में समान अधिकार, विवाह में स्वतंत्रता, तलाक का अधिकार, उत्तराधिकार का अधिकार तथा बच्चों की अभिभावकता जैसे क्रांतिकारी प्रावधानों की वकालत की। संविधान में अनुच्छेद 14, 15 और 16 के माध्यम से लिंग के आधार पर भेदभाव को समाप्त करने तथा समान अवसर प्रदान करने का प्रावधान डॉ. आंबेडकर जी की दूरदर्शिता को दर्शाता है। डॉ. रंगा ने यह भी उल्लेख किया कि बाबा साहेब ने बाल विवाह, दहेज, बहुविवाह, सती प्रथा जैसी कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठाई और महिलाओं को शिक्षा, आर्थिक स्वावलंबन तथा राजनीतिक भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया।
विभाग की अध्यक्ष प्रो. अदिति ने दोनों वक्ताओं का हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा, “प्रो. सतीश और डॉ. प्रियंका रंगा ने अपने बहुमूल्य समय और ज्ञानवर्धक व्याख्यान से छात्रों को न केवल बाबा साहेब के जीवन से परिचित कराया, बल्कि सामाजिक न्याय और लैंगिक समानता के महत्व को भी समझाया। ऐसे कार्यक्रम छात्रों में जागरूकता, प्रेरणा और समावेशी सोच का विकास करते हैं।
इस अवसर पर डॉ. विक्रांत, डॉ. पवन डॉ. आरती, डॉ. नवनीत सहित सभी छात्र उपस्थित रहे।